સભ્ય:Bharwad Deva
દેખાવ
|| यदुुुवीर जसराज आपा भरवाड का इतिहास ||
🚩जय ग्वालीनाथ
🚩जय गोपाल
🚩जय झाझावडादेव
जसराज भरवाड के पिता का नाम देवभगु था I जसराज भगवान शिव का बडा भक्त था I जसराज भरवाड पराक्रमी योद्धा थे I जसराज भरवाड अभीरो एक करते हुए गुजरात के थरागढ पहोचे I जसराज की अलग अलग पत्नी से 21 पुत्र हुआ I जसराज के बडे पुत्र गमारा गोप सेना बनाई थी I गोप सेना के गमारा सेनापति था जसराज भरवाडने आज से 900 साल पहले भरवाड समाज की 3002 पुत्रीओ का एक साथ समुह लग्न तैयारी हो रही थी I तब मुस्लिम सुबे के सिपाही ग्वालो को परेराश कर रहे तब जसराज भरवाड के 21 पुत्र में सबसे बडे पुत्र गमारा ने मुस्लिम सिपाही के साथ युद्ध कीया तब कुछ सिपाही रणमेदान छोडकर चले गये मुस्लिम सुबे को सारी बात बताई इस समय थरागढ मे समूह लग्न की तैयारी हो रही थी I समुह लग्न के लिए माणेकथंभ हील ने लगा ब्राह्मणोने कहा की कायँ मे बहुत बडा विध्न आ ने वाला है I बाह्मणोने कहा समुह लग्न कोई विध्न न आये इस लिए बत्रीस लक्षणवाले पुरुष का बलिदान देना होगा I तब सारे भरु प्रदेश मे एक जसराज के बडे पुत्र गमारा ही बत्तीस लक्षण वाले पुरुष थे Iइसी समय मुस्लिम सुबेने हुकम भेजा की गमारा को हमको सोप दो नही तो समुह लग्न नही होने देगे गमारा को भी नही सोपा जा सकता ओर समुह लग्न को रोका भी नही जा सकता तब जसराज के पुत्र गमारा ने ग्वालीनाथ पास जाकर अपना मस्तक धड से अलग कर ग्वालीनाथ पर कमलपुजा की अभिरो के गढ मे शोक छा गया I ब्राह्मणो ने कहा गुरु गोविंद के बाद गमारा की पुजा होगी स्वयं धमँ की रक्षा के लिए गमाराने बलिदान दिया I माणेकथंभ का हिलना बंध हुआ समुह लग्न का कायँ शांति पुवँक पुणँ हुआ I जसराज भरवाड ने 900 साल पहले 3002 पुत्री का समुह लग्न कराके एक विश्व रेकोड बना दिया I
कुछ समय के बाद ग्वालो के मंदिर ग्वालीनाथ मे अलाउद्दीन खिलजी ने हमला कीया तब जसराज भरवाड ओर गोप भरवाड की सेना ने अलाउद्दीन खिलजी साथ युद्ध कीया I इस युद्ध में 5000 भरवाड शहीद हुए जसराज भरवाड ने खुसरो भरवाड को दिल्ली का राजा बनाया I
जसराज भरवाड को समाजने झाझावडा नाम दिया I
आज भी ग्वालीनाथ मंदिर झाझावडादेव के नाम से जाना जाता है |
ग्वालीनाथ मंदिर बनासकांठा जिले के कांकरेज तालुके मे थरा गाँव में हैं |
संदभँ:-यदुवंशी गोप भरवाड शौयँ गाथाँ